कुमारगुप्त प्रथम के चौथे प्रकार का सोने का सिक्का!
4) अश्वरूढ़ वाला सिक्का -
चौथे प्रकार के सिक्के पर एक ओर घोड़े पर सवार राजा की मूर्ति, धनुष बाण लेख विभिन्न प्रकार के है।
१) पृथिवी तलां - दिवं जयत्य जित:
२) क्षिति पति रजितो विजयी महेन्द्र सिंहो दिवं जयति
३) क्षिति पति - कुमार गुप्तो दिवं जयति
४) गुप्त कुल- व्योम शशि जयत्य जेयो जित महेन्द्र:
५) गुप्त कुलामल चंद्रो महेंद्र क्रमाजितो जयति
इस तरह के सिक्के ढाई सौ के लगभग पाए जाते है। उनमें गुप्त कुल व्योम शशि का लेख अधिक पाया जाता है। यह बहुत प्रसिद्ध लेख लगता है। फिर उसके बाद क्षिति पति रजितो का इस्तेमाल किया गया है। तीसरे गुप्त कुलामल चन्द्र और अंत में पृथ्वीतलम का इस्तेमाल मिलता है।
बयाना के सिक्कों में विशेषता यह है कि पिछे के भाग पर लक्ष्मी जी मोर को खिलाती हुई दिखलाई गई है।
कुछ सिक्के ऐसे भी मिले है जिसके पिछे के भाग पर लक्ष्मी सींक की बनी हुई तिपाई (मचिया) पर बैठी है। अप्रभाग में समानता है।
Comments
Post a Comment