पुरगुप्त के सिक्के !
स्कंदगुप्त के बाद स्कन्द गुप्त के सौतेले भाई पुरगुप्त ने थोड़े समय तक राज्य किया। पुरगुप्त और इनके वंशजों ने भारी तौल (सुवर्ण) के सिक्के तैयार कराए।
" धनुर्धरांकित वाला सिक्का " लोक प्रिय था। इन लोगों ने भी ऐसा ही सिक्का प्रचलित किया। इसके आगे के भाग पर पुर और पीछे के भाग पर श्री विक्रम: लिखा है।
ब्रिटिश संग्रहालय में प्रकाशदित्य नाम के सिक्के मौजूद है। ये भी सिक्के पुरगुप्त के माने जाते है। इसकी तौल 146 ग्रेन है।
इस पर आगे के भाग पर अशवरूढ राजा की मूर्ति , तलवार से सिंह को मार रही है। गरुणध्वज बना है। पीछे के भाग पर बैठी देवी की मूर्ति है और प्रकाशदित्य लिखा है।
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