केलाड़ी की रानी चेन्नम्मा - २
छत्रपति शिवाजी के पुत्र को रानी का संरक्षण
रानी अपने दरबार के कामों को पूर्ण करने के बाद गरीबों और साधु संन्यासियों को दान देती थी। एक दिन रानी जब दान दे रही थी तब चार सन्यासी वहाँ आये और चुपचाप खड़े हो गये।
फिर उनमें से एक ने बताया कि मैं संभाजी का भाई राजाराम हूँ ,मेरे भाई संभाजी को औरंगज़ेब ने मरवा दिया है और मुझे, मारने के लिए एक बड़ी सेना भेजी है। जिसने मेरे कई किलो पर कब्जा कर लिया है।
मुझे मरवा देने के बाद वह पूरे महाराष्ट्र पर कब्जा कर लेगा। मैं किसी तरह छिपकर आपके पास आया हूँ।
मैने कई राजाओं से शरण माँगी, लेकिन औरंगज़ेब के डर से किसी ने मेरी मदद नहीं की। रानी ने उनसे कहा कि मैं आपकी हर संभव मदद करुंगी।
जब औरंगज़ेब को यह पता चला तब उसने अपने बेटे अजमथ आरा को एक बड़ी सेना के साथ केलाड़ी पर आक्रमण करने के लिए भेज दिया। लेकिन तब तक राजाराम को सुरक्षित जिंजी के किले में पहुंचा दिया गया था।
औरंगज़ेब ने रानी को एक पत्र भेजा जिसमें लिखा था कि राजाराम को हमे सौंप दें नहीं तो मुगल सेना का सामना करना पड़ेगा।
इसके जवाब में रानी ने पत्र भेजा जिसमें लिखा था कि राजाराम हमारे राज्य में नहीं हैं, लेकिन सुना है वो यहाँ से होकर गुजरा है।
इस जवाब के मिलने से पहले ही रानी ने मुगल सेना का एक बड़ा भाग नष्ट कर दिया था और बाकी सेना औरंगज़ेब के आदेश से वापस चली गई।
रानी का दत्तक पुत्र
रानी ने बसपा नायक को गोद ले लिया था और उनका प्रशिक्षण भी हो रहा था।
रानी ने बासवपट्टनम के पास हुलीकर को अपने राज्य में मिला लिया था और यहाँ किले का पुनर्निर्माण कराके अपने दत्तक पुत्र की माँ के नाम पर चेन्नगिरि रख दिया।
अपने दत्तक पुत्र के राज्य भार संभालने योग्य हो जाने पर रानी चेन्नम्मा ने उसको सारा राज्य सौंप दिया।
रानी की समाधि
रानी चेन्नम्मा ने 1671 से 1696 तक राज किया। सावन मास में रानी ने अपने प्राण त्याग दिये। इनकी समाधि कोप्पालु मठ में है।
अन्य बातें
🍁रानी चेन्नम्मा एक सशक्त, निर्भीक और कुशल शासिका थी। उन्होंने दक्षिण भारत के केलाड़ी पर 25 सालों तक राज किया।
🍁राजा चेन्नम्मा से विवाह करना चाहते थे तब महामंत्री ने बताया कि राज परंपरा के अनुसार आप किसी राज घराने में ही विवाह कर सकते हैं,पर राजा ने इस बात को नहीं माना और चेन्नम्मा से ही विवाह किया।
🍁चेन्नम्मा प्रजा की हर संभव मदद करती और सभी उन्हें बहुत प्रेम करते थे।
🍁रानी चेन्नम्मा अरब और पुर्तगाल के लोगों से व्यापार भी करती थी। उन्होंने अरब देशों से अच्छी नस्ल के घोड़े भी मंगवाये थे।
🍁रानी ने नीलकंठेश्वर मंदिर के लिये एक सुंदर सा रथ बनवाकर भेंट किया।
🍁उन्होंने कई मंदिरों और धार्मिक स्थानों को जमीनें दान की।
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