सूर्य देव और उनकी पत्नी संज्ञा
💚 विश्वकर्मा जी की पुत्री संज्ञा सूर्य देव की पत्नी थी। उनके मनु, यम और यमी - तीन संताने हुई।
💚 आगे चलकर पति का तेज सहन न कर सकने के कारण संज्ञा ने अपनी शक्ति से अपने जैसी ही छाया को बनाया और अपने पति की सेवा में नियुक्त कर स्वयं तपस्या के लिए वन में चली गई।
💚 सूर्य देव छाया को संज्ञा समझकर उन्हीं के साथ रहने लगे और उनके छाया से शनैश्चर (शनि देव) , एक मनु तथा तपती ये तीन संताने हुई।
💚 एक दिन जब छाया ने क्रोध में यम को श्राप दिया, तब सूर्य देव और यम को ज्ञात हुआ कि यह तो कोई और है। तब सारा रहस्य खुला, फिर सूर्य देव ने अपने शक्ति से उन्हें पता चला की उनकी पत्नी संज्ञा घोड़ी का रूप धारण कर वन में तपस्या कर रही है।
💚 तब सूर्य देव ने अश्वरूप धारण करके संज्ञा से दो अश्विनी कुमार और रेत:स्राव के अनंतर ही रेवंत को उत्पन्न किया।
💚 तब विश्वकर्मा जी ने सूर्य को भ्रमियंत्र (सान) पर चढ़ाकर उनका तेज छांटा, जो पृथ्वी पर गिरा। पृथ्वी पर गिरे हुए उस सूर्य के तेज से ही विश्वकर्मा जी ने विष्णु भगवान का चक्र, शंकर जी का त्रिशूल, कुबेर का विमान और कार्तिकेय की शक्ति बनायी तथा अन्य देवताओं के जो - जो शस्त्र थे उन्हें उससे बनाया।
💚 छाया संज्ञा के पुत्र दूसरे मनु अपने अग्रज मनु का सवर्ण होने से सावर्णि कहलाये।
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