प्राचीन काल में यज्ञ द्वारा प्राप्त संताने कौन है ? - १
प्राचीन काल में पुत्र या पुत्री के यज्ञ द्वारा प्राप्ति का विधान हमारे पुराणों और धार्मिक ग्रंथों में कई उदाहरण उपलब्ध है।
💠 राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न -
पुत्रेष्टि यज्ञ की सबसे प्रसिद्ध घटना भगवान राम सहित उनके चारो भाइयों के जन्म की है।
ऋष्यश्रृंग नाम के ऋषि ने ही राजा दशरथ के यहाँ पुत्रप्राप्ति के लिए यज्ञ किया था, इस यज्ञ का विधान अथर्ववेद में है।
इस यज्ञ के बाद उस यज्ञ कुंड से चरु प्रकट हुआ। जिसे राजा दशरथ की तीनों रानियों ने खाया और समय आने पर कौशल्या ने राम जी को, कैकयी ने भरत जी को और सुमित्रा ने लक्ष्मण - शत्रुघ्न को जन्म दिया था।
ऋष्यश्रृंग राजा दशहरा की पुत्री शांता के पति थे। लक्ष्मण और भारत दोनों जुड़वाँ थे।
💠मनु के पुत्र सुद्युम्न
भागवत में श्री शुकदेव जी ने बताया है कि मनु ने पुत्र की इच्छा से मित्रवरुण नामक दो देवताओं का यज्ञ अनुष्ठान किया। इस यज्ञ में मनु की पत्नी श्रद्धा ने केवल दूध का सेवन करके ही अनुष्ठान किया।
इसके बारे में कहा गया है कि "मनु जैसा यज्ञ हुआ था, वैसा इस पृथ्वी पर और किसका हुआ था, सभी याज्ञिक वस्तुएं सुवर्णमय और अति सुंदर थीं।"
उस यज्ञ में इंद्र सोमरस से और ब्राह्मणगण दक्षिण से तृप्त हो गए थे, और इसमें मरुदगण भी शामिल थे और देवगण सदस्य भी थे।"
जिससे मनु के सुद्युम्न नामक पुत्र हुए। फिर महादेव जी के क्रोध के कारण वे स्त्री हो गया। जिसका विवाह बुध से हुआ और पुरुरवा नामक पुत्र का जन्म हुआ, जिसके बाद वह वापस सुद्युम्न में परिवर्तित हो गए।
💠द्रौपदी और धृष्टद्युम्न
पांचाल नरेश द्रुपद एक ऐसी सन्तान चाहते थे जो द्रोणाचार्य को मार सके। इस इच्छा की पूर्ति कौन कर सकता है ? इस प्रश्न के उत्तर तलाश में द्रुपद घूमते - घूमते गंगा तट के कल्मावी के नगर पहुंचे।
याज नामक एक ब्राह्मण ने यज्ञ किया और उस यज्ञ की अग्नि से -
पहले धृष्टद्युम्न और फिर द्रौपदी (कृष्णा) नाम की कन्या उत्पन्न हुई।
💠राजा अंग के पुत्र
भागवत पुराण में राजा अंग ने पुत्र प्राप्ति के लिए भगवान विष्णु का यज्ञ कराया। तब यज्ञ कुंड से एक दिव्य पुरुष प्रकट हुआ था, जो श्वेत वस्त्र धारण किए हुए था, सोने का हार पहना हुआ था, उसके हाथ में एक सोने का थाल था, जिसमें खीर रखी थी।
इस दिव्य पुरुष के दर्शन सभी को हुए। खीर को ग्रहण करने के लिए राजा ने ऋषियों की आज्ञा ली और फिर उस खीर को रानी को खाने के लिए दे दिया। जिससे समय आने पर रानी को पुत्र की प्राप्ति हुई।
💠राजा चित्रकेतु के पुत्र
राजा चित्रकेतु ने अंगिरा ऋषि से पुत्र प्राप्ति के लिए यज्ञ कराया।
यज्ञ में चित्रकेतु की रानी कृतद्युति को अंगिरा ऋषि ने यज्ञ के शेष अन्न को ग्रहण कराया और यज्ञ के शेष अन्न को ग्रहण करके रानी ने चारु को भी ग्रहण किया। जिसके बाद समय आने पर उन्हें संतान प्राप्ति हुई।
💠राजा भरत के पुत्र
विष्णु पुराण के अनुसार महाराज दुष्यंत और शकुंतला के पुत्र भरत थे, उनकी तीन रानियाँ थीं। भरत ने पुत्र की कामना से मरुत्सोम नामक एक यज्ञ कराया।
जिससे उन्हें भरद्वाज नाम के पुत्र की प्राप्ति हुई।

Comments
Post a Comment